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बोले रक्षामंत्री—भारत की बढ़ती ताकत और वैश्विक नेतृत्व क्षमता पर गर्व,

SHIDDHANT
17 Oct 2025 7:31 PM IST
बोले रक्षामंत्री—भारत की बढ़ती ताकत और वैश्विक नेतृत्व क्षमता पर गर्व,
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Lucknow लखनऊ। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में कहा कि आज भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान पूरी तरह बदल चुकी है। जब भारत विश्व मंचों पर बोलता है, तो पूरी दुनिया ध्यान से सुनती है। उन्होंने कहा, “अब भारत के साथ कोई ‘दबंगई’ या ‘डराने-धमकाने’ की कोशिश नहीं कर सकता। दुनिया को यह समझ लेना चाहिए कि नया भारत आत्मविश्वासी और सामर्थ्यवान है। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने बीते वर्षों में न केवल आर्थिक और रक्षा क्षेत्र में बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी जबरदस्त मजबूती हासिल की है। उन्होंने कहा, “पहले जब भारत कुछ कहता था तो कई देश उसे नजरअंदाज कर देते थे, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। अब वैश्विक मुद्दों पर भारत की राय मायने रखती है और विश्व समुदाय उसका सम्मान करता है।”
रक्षामंत्री ने कहा कि ‘नया भारत’ कमजोर नहीं बल्कि निर्णायक और आत्मनिर्भर भारत है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चाहे सीमा सुरक्षा की बात हो, अंतरिक्ष तकनीक की या फिर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की—भारत आज किसी भी चुनौती का डटकर सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने ‘एक्सपोर्टिंग डिफेंस नेशन’ बनने की दिशा में भी बड़ी छलांग लगाई है। “पहले हम दूसरे देशों से हथियार खरीदते थे, अब अपने हथियार दूसरे देशों को बेच रहे हैं। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है,” उन्होंने कहा।
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारतीय सेना और रक्षा उद्योग की क्षमता को अब दुनिया स्वीकार कर रही है। “डिफेंस सेक्टर में हमारी नीतियां पारदर्शी हैं और लक्ष्य स्पष्ट है—भारत को रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत नई तकनीकों का विकास करना। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले की सरकारें विदेश नीति को लेकर कमजोर रहीं, लेकिन अब भारत वैश्विक नेतृत्व में अपनी भूमिका निभा रहा है। “अब हम केवल सुनते नहीं, बल्कि सुनाए जाने योग्य बातें करते हैं,” उन्होंने जोड़ा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की विदेश नीति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पर आधारित है, जहां हर देश के साथ समानता और सहयोग पर बल दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब किसी के दबाव में नहीं आता और न ही किसी को डराता है। उन्होंने अंत में कहा कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल एशिया का नेतृत्व करेगा बल्कि वैश्विक स्थिरता और शांति का केंद्र बनेगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
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